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 गन्ने के साथ आलू-प्याज , दो कट्ठा गन्ने में निकला 4 कुंतल आलू , चार कुंतल प्याज

संवादाता , सुरेश चन्द गाँधी / श्रवण कुमार मद्धेशिया


हाटा क्षेत्र में गन्ने की खेती के साथ सहफसली खेती करने के लिए व किसानों की आय बढ़ाने, गन्ने की दो पंक्तियों के बीच खाली स्थान का भरपूर उपयोग करने एवं गन्ने की खेती में कृषि यंत्रों से लाभ गन्ना विकास के लिए शासन की योजनाओं, चीनी मिल की विकास योजनाओं, गन्ने में कीट रोग नियंत्रण आदि विषयों पर जानकारी देने के लिए उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच गोरखपुर द्वारा हाटा विकासखंड के ग्राम रामपुर पिटवा में गन्ना विकास गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण उपरांत “किसान के खेत पर मिलिए कार्यक्रम में” गन्ना संस्थान के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने प्रगतिशील किसान श्री अनिल सिंह के खेत पर जाकर रिंग पिट विधि से बोये गए गन्ने में प्याज की सहफसली खेती देखा। इस अवसर पर श्री अनिल सिंह ने बताया कि गन्ना प्रजाति को. 118 है रिंग पिट विधि से अक्टूबर माह में गन्ना बोया था। एक गड्ढे में 20 गेड़ी बोया हूँ। गोबर की सड़ी खाद प्रत्येक गड्ढे में 5 किलो डाला हूँ, नवंबर माह में इसमें आलू प्रथम सप्ताह में बोया, फरवरी के प्रथम सप्ताह में आलू को खोद लिया। चार कुंतल आलू निकला फिर उसी खेत में फरवरी के प्रथम सप्ताह में प्याज की रोपाई कर दिया। श्री अनिल सिंह ने बताया कि हाटा ब्लॉक परिसर में आयोजित गोष्ठी में गन्ना संस्थान पिपराइच द्वारा गन्ने के साथ आलू, प्याज, लहसुन, गोभी, टमाटर का फोटोग्राफ दिखाकर सहायक निदेशक द्वारा इसका लाभ बताया गया था जिसको देखकर हमने दो कट्ठा खेत में आलू और प्याज बोया। प्याज भी लगभग चार कुंतल हुआ है जिस खेत में प्याज बोया हूं उसमें पिहिका कीट नहीं लगा है। गन्ना भी अन्य खेत से अलग है। गन्ना गोष्ठी से हमारे खेती करने के ढंग में बदलाव आया है।
आलू ₹20 किलो बेचा। प्याज इस समय ₹35 किलो बिक रहा है। दो कट्ठा गन्ने में 8000 का आलू, लगभग ₹12000 का प्याज होगा। दो कट्ठा में लगभग 45 से 50 कुंतल गन्ना होगा क्योंकि रिंग विधि से बोये हैं। इस बार 12 कट्ठा रिंग विधि से बोया हूँ। उसमें 1000 गड्ढा बनाया था। हाटा परिक्षेत्र में ढाढ़ा चीनी मिल के अधिशासी अध्यक्ष श्री करन सिंह स्वयं गन्ना विकास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। जिसका परिणाम है कि क्षेत्र में 30% गन्ना क्षेत्रफल बढ़ा है, सहायक निदेशक के साथ बराबर विचार विमर्श कर रहे हैं। पेड़ी प्रबंधन, सहफसली खेती, कृषि यंत्र से कृषकों को जोड़ना, आय बढ़ाना, उत्पादन बढ़ाना करन सिंह का मूल उद्देश्य है।

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